परम्परागत वैद्यराजों को मानदेय, बीमा व सुविधा प्रदान करने की मांग
शंभू शक्ति स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवा संस्था ने कलेक्टर से किया आग्रह
धमतरी छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवा संस्था परम्परागत प्रमाणिकरण संघ ने परम्परागत वैद्यराजों के हित में मांग पत्र कलेक्टर धमतरी को सौंपा है। संस्था ने छत्तीसगढ़ के वैद्यराज, सिरसाह गुड़िन्या, गायता मांझी जैसे परम्परागत वैद्यराजों को शासन से मानदेय, बीमा, आवास एवं पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने की मांग की है।
जिसमें संस्था ने कहा है कि ये वैद्यजन वर्षों से बिना किसी शुल्क के ग्रामीणों को परम्परागत आयुर्वेदिक उपचार और अनुभव आधारित चिकित्सीय सेवा दे रहे हैं। इनकी सेवाएँ ग्रामीण समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में शासन स्तर पर इनके सम्मान और संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। संस्था द्वारा प्रस्तुत मुख्य माँग इस प्रकार है— वैद्यराजों को मासिक मानदेय दिया जाए।
शासन स्तर पर वैद्यराज एवं उनके परिवार का बीमा करवाया जाए। आवास हेतु वैद्यराज के निःशुल्क भूमि आवंटन कर मकान निर्माण हेतु आर्थिक सहायता दी जाए। आजीवन पेंशन दी जाए। वन औषधीय पादप बोर्ड में योग्य वैद्यराजों को सेवा का अवसर दिया जाए।
संस्था ने यह भी आग्रह किया है कि सिरसाह गुड़िन्या, गायता मांझी जैसे परम्परागत वैद्यराजों को शासन की योजनाओं में शामिल कर उनके लिए मानदेय, बीमा तथा आवास की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
वहीं संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि वैद्यराज समाज और जनजातीय परंपरा के महत्वपूर्ण धरोहर हैं। शासन द्वारा इनकी आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने से परम्परागत उपचार पद्धति को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
संस्था ने यह भी उल्लेख किया है कि सिरसाह गुड़िन्या, गायता मांझी जैसे परम्परागत वैद्यराजों की सेवाएँ ग्रामों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में शासन स्तर पर उनके सम्मान और संरक्षण के लिए कदम उठाए जाएँ। संस्था की मांग इस प्रकार है कि वैद्यराजों को मासिक मानदेय दिया जाए, शासन स्तर पर वैद्यराज एवं उनके परिवार का बीमा करवाया जाए, आवास हेतु वैद्यराज के निःशुल्क भूमि आवंटन कर मकान निर्माण हेतु सहायता दी जाए।
जिले में कम से कम 25 और राज्य में 50 वैद्यराजों की नियुक्ति की जाए।
जिसमें संस्था ने यह भी आग्रह किया है कि सिरसाह गुड़िन्या, गायता मांझी जैसे परम्परागत वैद्यराजों को शासन की योजनाओं में शामिल कर उनके लिए मानदेय, बीमा तथा आवास की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
वहीं संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि वैद्यराज समाज और जनजातीय परंपरा के महत्वपूर्ण धरोहर हैं। शासन द्वारा इनकी आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने से परम्परागत उपचार पद्धति को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।