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सिंचाई विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर धमतरी

सिंचाई विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर
धमतरी 
सूचना का अधिकार के तहत एक पेज की फोटो कॉपी का शुल्क 20.90 रुपये, 273 पेज के लिए 5712 रुपये तय
धमतरी सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली अब संदेह के घेरे में आ गई है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के बदले विभाग द्वारा जो शुल्क तय किया गया है, वह न केवल चौंकाने वाला है बल्कि नियमों के विरुद्ध भी प्रतीत होता है।
सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर विभाग ने एक पेज की फोटो कॉपी के लिए 20 रुपये 90 पैसे शुल्क निर्धारित किया है। यह राशि किसी फोटो कॉपी दुकान को नहीं बल्कि विभाग द्वारा बताई गई प्रति पेज कॉपी फीस है। इसके बावजूद इतनी अधिक दर तय किया जाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि विभाग द्वारा 273 पेज की जानकारी के लिए कुल 5712 रुपये शुल्क तय किया गया है, जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम में सामान्यतः प्रति पेज 2 रुपये शुल्क का स्पष्ट प्रावधान है। ऐसे में इतनी भारी भरकम राशि तय करना केवल लापरवाही नहीं बल्कि आवेदक को भ्रमित करने की मंशा या फिर जानकारी देने से बचने की साजिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
जवाब से बचने का तरीका?
सूत्रों का कहना है कि कई बार विभाग जानबूझकर अधिक शुल्क तय कर देता है, ताकि आवेदक फीस जमा न कर सके और सूचना देने की बाध्यता स्वतः समाप्त हो जाए। इस मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या यह कदम सूचना देने से बचने के लिए अपनाई गई रणनीति है।
नियमों की अनदेखी या सुनियोजित प्रयास?
जानकारों के अनुसार यह मामला साधारण प्रशासनिक चूक नहीं लगता। सूचना का अधिकार कानून पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बना है, लेकिन इस तरह की प्रक्रिया उसकी भावना के विपरीत है और आम नागरिक के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास मानी जा रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग
अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन और राज्य सूचना आयोग इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाते हैं। नागरिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
यह प्रकरण सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है और सूचना का अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर चिंता पैदा करता है।

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