राष्ट्रपति के 'दत्तक पुत्र' कमार परिवार फॉरेस्ट गार्ड की प्रताड़ना के शिकार, व्यवस्था पर उठे सवाल
नगरी (धमतरी) एक ओर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदिवासी समुदायों,
विशेषकर 'विशेष पिछड़ी जनजाति' के उत्थान के लिए करोड़ों की योजनाएं चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र से आई एक खबर ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले कमार जनजाति के परिवार आज एक फॉरेस्ट गार्ड की प्रताड़ना और अवैध वसूली से त्रस्त हैं।
प्रधानमंत्री की योजनाओं के बीच 'खाकी' का खौफ
यह विरोधाभास तब सामने आया जब
हिंदुत्व टीवी धमतरी कि टीम बगुड़ापारा बाजार कुर्रीडीह पहुंची डर और और खौफ के साये मे रह रहे कमार परिवार को प्रशासन कि नीतियों का भरोसा दिलाया तब जाकर जंगल में रहने वाले कमार परिवारों ने वन विभाग के दफ्तर पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाई।
ग्रामीणों का कहना है कि
मेहनत की कमाई पर डाका
जो कमार परिवार वनोपज बेचकर एक-एक रुपया जुटाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं, उनसे कथित रूप से फॉरेस्ट गार्ड द्वारा डरा-धमकाकर अवैध वसूली की जा रही है।
जेल जाने का डर: जंगल से सूखी लकड़ियां बीनना इनकी पारंपरिक आजीविका है, लेकिन रक्षक ही भक्षक बनकर इन्हें जेल भेजने की धमकी दे रहा है।
दत्तक पुत्रों की अनदेखी
शासन-प्रशासन जिन्हें 'दत्तक पुत्र' का दर्जा देता है, धरातल पर वही परिवार सरकारी तंत्र की वसूली का शिकार हो रहे हैं।
कैसा है यह न्याय?
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि एक तरफ प्रधानमंत्री आवास और उज्ज्वला जैसी योजनाओं से उन्हें सशक्त करने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ वन विभाग का एक कर्मचारी उनकी आजीविका पर प्रहार कर रहा है। "क्या यही वह विकास और न्याय है जिसका वादा हमसे किया गया था?" यह सवाल आज हर उस कमार परिवार के मन में है जो वन विभाग के डर के साये में जीने को मजबूर है।
अधिकारियों का रुख और भविष्य की रणनीति
डी एफ ओ श्रीकृष्ण जाधव का मामले में आवेदन मिलने की पुष्टि की है और जल्द इस मामले कि जांच के बाद कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
हालांकि, ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।
अब यह देखना दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होगा कि जिले के आला अधिकारी इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या राष्ट्रपति के इन 'दत्तक पुत्रों' को सच में न्याय मिलेगा या रक्षक की मनमानी इसी तरह चलती रहेगी?