_*धमतरी में गुरु या ज़मीन के सौदागर..?*_
_*किताबें छूटीं, प्लॉटिंग जुड़ी —*_
_*बच्चों का भविष्य किसके हवाले!*_
_धमतरी से उठती एक खबर ने शिक्षा व्यवस्था की नींव को ही हिला कर रख दिया है..... जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे अब जमीन के कागज़ात थामे नजर आ रहे हैं.... जिन्हें बच्चों को ज्ञान देना था, वो खुद कारोबार की गलियों में भटकते दिखाई दे रहे हैं..... कहा जा रहा है कि कुछ सरकारी शिक्षक अब क्लासरूम से ज्यादा रजिस्ट्री ऑफिस में सक्रिय हैं.... हालात इतने पेचीदा हो चुके हैं कि ये शिक्षक सिर्फ जमीन खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं, बल्कि अवैध प्लॉटिंग जैसे कामों में भी कथित तौर पर शामिल बताए जा रहे हैं...._
_*आज हर जुबां पर एक ही सवाल है —*_
_जब उस्ताद ही रास्ता बदल ले, तो तालीम का क्या होगा… ?_
_दरअसल धमतरी जिले में शिक्षा विभाग को लेकर लोगों में तेज आक्रोश देखने को मिल रहा है..... आरोप है कि कुछ सरकारी शिक्षक अपनी असली जिम्मेदारी — बच्चों को पढ़ाना — को नजरअंदाज कर, जमीन के कारोबार में पूरी तरह डूब चुके हैं...... स्थानीय लोगों का कहना है कि ये शिक्षक अक्सर रजिस्ट्री दफ्तर में दिखाई देते हैं, जहां वे लगातार जमीनों की खरीद-बिक्री में लगे रहते हैं..... इतना ही नहीं, चर्चा यह भी है कि कुछ शिक्षक अवैध प्लॉटिंग में भी हिस्सेदारी निभा रहे हैं और इससे मोटा मुनाफा कमा रहे हैं..... वही सबसे बड़ा सवाल उनकी संपत्ति को लेकर उठ रहा है.... बताया जा रहा है कि — 30-40 हजार रुपये महीना वेतन पाने वाले ये शिक्षक, आज करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं...... ऐसे में लोगों के मन में शक और गहराता जा रहा है कि आखिर इतनी दौलत का स्रोत क्या है..?_
_*उठते सवाल और जांच की मांग*_
_जनता की मांग है कि अगर ईमानदारी से रजिस्ट्री ऑफिस के CCTV फुटेज खंगाले जाएं, तो इस पूरे खेल का खुलासा हो सकता है.... वही लोगों की मांग है — अगर जांच हो जाए, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं और एक बड़े खेल का पर्दाफाश हो सकता ये.._
_*बच्चों के भविष्य पर संकट*_
_इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों का हो रहा है..... जहां छात्र बेहतर तालीम और मार्गदर्शन की उम्मीद करते हैं, वहीं उनके शिक्षक दूसरे धंधों में मशगूल नजर आ रहे हैं_
_*सवाल - प्रशासन की चुप्पी पर ?*_
_आखिर क्यों अब तक ऐसे शिक्षकों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई..? क्या प्रशासन को इस पूरे मामले की जानकारी नहीं, या फिर सब कुछ जानकर भी खामोशी ओढ़ ली गई है..?_
_*जनता में आक्रोश*_
_इस मुद्दे को लेकर लोगों में गुस्सा, बेचैनी और नाराज़गी साफ नजर आ रही है.... हर कोई यही पूछ रहा है — क्या शिक्षा अब सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई है..? और क्या बच्चों का भविष्य यूं ही सौदों में बिकता रहेगा…?_
_अगर समय रहते इस गंभीर मामले पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ी इसकी भारी कीमत चुका सकती है.... अब जरूरत है सख्त जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही की..... ताकि तालीम का ये मंदिर फिर से अपना सम्मान और भरोसा हासिल कर सके।_