धमतरी बायपास हाईवे पर पशुधन की अनियंत्रित आवाजाही: सड़क दुर्घटनाओं का कहर, मनुष्य-वन्यजीव दोनों की जान-माल का भारी नुकसान
छत्तीसगढ़ के धमतरी बायपास हाईवे के संचालन शुरू होते ही पशुधन की आवाजाही ने सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से पशुओं को हटाने के लिए ठेका-आधारित टीम, कैमरे और हेल्पलाइन नंबर की व्यवस्था की गई थी, लेकिन ये सारी सुविधाएं कागजों पर ही सिमटकर रह गई हैं। हेल्पलाइन नंबर या तो काम नहीं करता या शायद ही कभी उठाया जाता है। नतीजा – हर महीने कई गंभीर दुर्घटनाएं, जिनमें मानव जीवन और संपत्ति के साथ-साथ पशुधन व वन्यजीवों की भी बेरहमी से कुचल दी जा रही है।
हाईवे पर बिना किसी रोक-टोक के घूमते गाय-बैल, भैंसें और अन्य पशु वाहनों के सामने आ जाते हैं। रात के समय तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब ड्राइवर को अचानक सामने दिखने वाले पशु को बचाने की कोशिश में वाहन अनियंत्रित हो जाता है। पिछले कुछ महीनों में हुई कई दुर्घटनाओं में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, कई की मौत हो चुकी है। वाहनों को भारी क्षति पहुंची है। सबसे दर्दनाक बात यह है कि इन दुर्घटनाओं में पशुधन की भी जान चली जाती है। कई बार वन्यजीव भी हाईवे पार करते समय वाहनों की चपेट में आ जाते हैं। स्थानीय किसानों के मुताबिक, उनके मवेशी खुली चरागाहों की तलाश में हाईवे पर आ जाते हैं और फिर ट्रैफिक का शिकार बन जाते हैं।
एनएचएआई ने पशुओं की निगरानी के लिए कैमरे लगाए थे और एक ठेका-आधारित टीम को पशु हटाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन जमीन पर इनका कोई असर नजर नहीं आता। हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने वाले लोगों का कहना है कि घंटों फोन लगाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिलता। ठेका टीम की गाड़ियां कभी-कभी दिखती हैं, लेकिन पशुओं को हटाने का कोई ठोस प्रयास नहीं होता। निगरानी कैमरे या तो बंद पड़े हैं या फिर उनकी फीडिंग किसी को देखने वाला नहीं है।
स्थानीय निवासियों और प्रभावित परिवारों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। एक प्रभावित परिवार के सदस्य ने बताया, “हमारी गाय हाईवे पर कुचली गई। एनएचएआई को सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल यह है कि क्या ये अधिकारी कभी जागेंगे या फिर ये सारी टीमें बिना जवाबदेही के वेतन लेती रहेंगी?”
विशेषज्ञों का कहना है कि हाईवे के दोनों ओर उचित बाड़बंदी, पशु-अंडरपास और प्रभावी निगरानी की तुरंत जरूरत है। फिलहाल तो सारा सिस्टम कागजी खानापूर्ति का शिकार बना हुआ है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो धमतरी बायपास हाईवे मानव-वन्यजीव दोनों के लिए मौत का जाल बनता रहेगा।
गौ माता की तस्करी भी हो रही बाईपास से
क्या एनएचएआई अब जागेगा? या फिर ये सारी व्यवस्थाएं बस दिखावा बनकर रह जाएंगी? स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार जवाब का इंतजार कर रहे हैं।