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खरेंगा में मानवता शर्मसार: रेत माफियाओं ने खोदी श्मशान की जमीन, कंकाल देख भड़के ग्रामीण


​धमतरी -विकास की आड़ में प्रकृति का दोहन तो आम बात थी, लेकिन अब रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि उन्होंने मुर्दों के घर यानी श्मशान घाट को भी नहीं बख्शा। ग्राम खरेंगा में अवैध रेत उत्खनन का एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला चेहरा सामने आया है, जिसे देखकर पूरा गांव आक्रोशित है।
​नदी किनारे स्थित श्मशान घाट की जमीन से बेतरतीब रेत निकालने के कारण दफनाई गई लाशें कंकाल के रूप में बाहर नजर आने लगी हैं। इस वीभत्स दृश्य ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
​पूर्वजों के अपमान पर जागा ग्रामीणों का आक्रोश
​अवैध रेत चोरी और श्मशान की इस दुर्दशा के खिलाफ अब पूरा गांव एकजुट हो गया है। ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती नीलम साहू के नेतृत्व में ग्रामीणों ने रेत माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
​गाँव के प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं, जिनमें प्रमुख रूप से टी आर साहू, योगेश्वर साहू, राधेश्याम बारले, राजेंद्र भारती, चुम्मान साहू, सूरज साहू, रविकांत साहू, संजीव साहू, थानु राम चक्रधारी, देवेंद्र साहू सहित महिला शक्ति से ऊषा विश्वकर्मा, सीता चक्रधारी और हेमीन साहू शामिल हैं, ने इस कृत्य का कड़ा विरोध किया है।
​"यह सिर्फ पर्यावरण का नुकसान नहीं है, यह हमारे पूर्वजों और हमारी आस्था का घोर अपमान है। चंद पैसों के लालच में माफियाओं ने श्मशान को कब्रिस्तान और फिर उसे कंकालों की नुमाइश का मैदान बना दिया। हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
— आक्रोशित ग्रामीण
​आगे की बड़ी कार्रवाई पर बनी सहमति
​रेत माफियाओं के आतंक से निपटने और गाँव की अस्मिता बचाने के लिए सरपंच श्रीमती नीलम साहू की मौजूदगी में एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में सभी ग्रामीणों ने एक सुर में माफियाओं के खिलाफ कानूनी और जमीनी लड़ाई लड़ने पर सहमति जताई है।
​ग्रामीणों ने आगामी कार्रवाई के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए हैं:
​प्रशासनिक शिकायत: अनुविभागीय अधिकारी (SDM), खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कर तत्काल उत्खनन रोकने की मांग की जाएगी।
​दोषियों पर एफआईआर: श्मशान घाट को क्षति पहुँचाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में माफियाओं पर सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कराने का दबाव बनाया जाएगा।
​जमीनी पहरा: ग्रामीण अब खुद एकजुट होकर श्मशान और नदी क्षेत्र की निगरानी करेंगे ताकि दोबारा कोई गाड़ी वहाँ न घुस सके।
​प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
​ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रेत का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की मूक सहमति के बिना इतनी बड़ी जुर्रत नामुमकिन है। अब देखना यह होगा कि इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद प्रशासन नींद से जागता है या माफियाओं को अभयदान मिलता रहेगा। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के बाध्य होंगे

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