*रोज़गार नहीं, ताश की बाज़ी !*
*धमतरी के बेरोज़गार युवाओं के सपनों पर युवा उत्सव का तमाशा ?*
*हिमाचल रवाना हुए वालेंटियर्स की ट्रेन में ताश खेलती तस्वीरें वायरल,*
*उठे बड़े सवाल*
एक तरफ देश और प्रदेश में बेरोज़गारी की मार झेलता युवा अपने भविष्य को लेकर परेशान है..... डिग्रियां हाथ में हैं लेकिन नौकरी नहीं... गांव से लेकर शहर तक नौजवान नशे, अवसाद और भटकाव की गिरफ्त में आते जा रहे हैं..... वहीं दूसरी तरफ युवा सशक्तिकरण और प्रतिभा विकास के नाम पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की हकीकत अब सवालों के घेरे में दिखाई देने लगी है.... दरअसल धमतरी जिले से हिमाचल प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय युवा उत्सव में भाग लेने के लिए रवाना हुए 20 वालेंटियर्स की ट्रेन यात्रा की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें युवा ताश पत्ती खेलते नजर आ रहे हैं..... इन तस्वीरों ने पूरे आयोजन और उसकी मंशा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.... हाल ही में धमतरी में आयोजित यूथ फेस्ट कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा प्रदर्शन के नाम पर किया गया था.... जिला प्रशासन और आयोजकों द्वारा इसे युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बताया गया..... रवाना होने से पहले कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने भी युवाओं से अनुशासन, समर्पण और जिले का गौरव बढ़ाने की अपील की थी..... लेकिन अब वायरल तस्वीरों ने माहौल बदल दिया है.... लोग सवाल पूछ रहे हैं आखिर इस पूरे आयोजन से युवाओं को मिला क्या...? क्या यह सिर्फ सरकारी पैसे से मनोरंजन यात्रा बनकर रह गया...?
क्या युवा उत्सव का मकसद युवाओं को दिशा देना था या सिर्फ भीड़ जुटाकर कार्यक्रमों की खानापूर्ति करना...? आज धमतरी सहित पूरे प्रदेश का युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहा है.... पढ़े-लिखे नौजवान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते-करते उम्र पार कर रहे हैं, लेकिन नौकरी नहीं मिल रही.... कई युवा मजबूरी में छोटे-मोटे काम कर रहे हैं, तो कई बेरोज़गारी और तनाव की वजह से नशे की तरफ बढ़ते जा रहे हैं.... वहीं धमतरी की बात करें तो यहां बाहर राज्यों से आए लोग व्यापार और दुकानें चला रहे हैं, जबकि स्थानीय युवा अवसरों के इंतजार में बैठे हैं..... ऐसे में करोड़ों के आयोजनों, मंचों, भाषणों और उत्सवों के बीच युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है...... सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि अगर यही युवा नेतृत्व और प्रतिभा विकास है, तो फिर बेरोज़गार नौजवानों के भविष्य की चिंता कौन करेगा...? क्यों युवाओं को स्किल, रोजगार, उद्योग और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के बजाय सिर्फ कार्यक्रमों और फोटो सेशन तक सीमित रखा जा रहा है...? हालांकि कुछ लोग इसे सामान्य यात्रा का हिस्सा भी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ट्रेन में ताश खेलना कोई अपराध नहीं, लेकिन सवाल सिर्फ ताश खेलने का नहीं है..... सवाल उस सोच का है, जहां युवा उत्सवों की चमक के पीछे असली मुद्दे — रोजगार, भविष्य और दिशा — कहीं दबते नजर आ रहे हैं.... अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस वायरल तस्वीर और उठ रहे सवालों पर क्या जवाब देता है.... क्योंकि धमतरी का युवा अब सिर्फ भाषण नहीं, अपने भविष्य का ठोस रास्ता चाहता है।