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"​झन भूलो सतीश जैन ला": छालीवुड के 'वट वृक्ष' और अपराजेय योद्धा की नई हुंकार, 'झन भूलो माँ बाप ला-2' का समूचे प्रदेश को इंतजार!​छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत में पिछले ढाई दशकों से एक नाम वट वृक्ष की तरह अडिग और गहराई से स्थापित है—सतीश जैन। आज वे केवल एक फिल्मकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा के पर्याय और इसकी जीवन रेखा बन चुके हैं। जब-जब हमारी आंचलिक सिनेमा की नैया डगमगाती है या दर्शकों का रुझान हमारे सिनेमा के प्रति कम होने लगता है , तब-तब एक अपराजेय योद्धा की तरह सतीश जैन अपनी नई कृति के साथ पर्दे पर उतरते हैं, और पूरे प्रदेश के सिनेमाघर दर्शकों की भारी भीड़ से गुलजार हो उठते हैं।​उनकी फिल्मों की सफलता का लाभ केवल उन्हें नहीं मिलता, बल्कि संजीवनी बूटी की तरहइसका सीधा फायदा समूचे छालीवुड और अन्य छत्तीसगढ़ी फिल्मों को मिलता है। सिनेमा प्रेमी भी उन पर अपना भरपूर आशीर्वाद लुटाते हैं।​राज्य निर्माण के साथ ही सतीश जैन ने अमर ऐतिहासिक फिल्म "मोर छैंहहा भुइंया" दी थी। आज वह शीर्षक खुद सतीश जैन के व्यक्तित्व पर बिल्कुल सटीक बैठता है। वे छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत के लिए एक ऐसी 'छैंहहा भुइंया' ब न चुके हैं, जिसकी छांव में पूरा छालीवुड पल्लवित और पुष्पित हो रहा है। इस उम्र में भी सिनेमा के प्रति उनका आत्मीय समर्पण और जुनून ऐसा है कि वे जिस विषय या जिस कलाकार पर हाथ रख देते हैं, वह 'दीपक' के समान रोशन हो उठता है और उसे जनता का जबरदस्त प्रतिसाद मिलता है।​इन दिनों छत्तीसगढ़ी सिनेमा के 'लीजेंड शो-मैन' सतीश जैन अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म "झन भूलो माँ बाप ला-2" को लेकर चौतरफा सुर्खियों में हैं। समूचा प्रदेश इस पारिवारिक और सामाजिक सरोकार से भरी फिल्म की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा है। यह कहना बिल्कुल भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि सतीश जैन अब खुद में सिनेमा की एक ऐसी जीवंत पाठशाला बन चुके हैं, जिनसे कोई भी, कभी भी और कहीं भी बहुत कुछ सीख सकता है।​एक संदेश जो हर छत्तीसगढ़ी के दिल से निकलता है वह ये कि "जैसे हम अपनी संस्कृति और संस्कारों को नहीं भूल सकते, वैसे ही 'झन भूलो माँ बाप ला' की तर्ज पर यह कहना भी जरूरी है कि— 'झन भूलो सतीश जैन ला'। क्योंकि यही वह शख्सियत हैं जो सदैव हमारे परिवार को स्वस्थ और साफ-सुथरा मनोरंजन देते हैं और हमारे छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत की असली बुनियाद हैं।"​आइए, इस बेजोड़ फिल्मकार के विजन, समर्पण और छत्तीसगढ़ी माटी के प्रति उनके इस अगाध प्रेम को थियेटरों में जाकर अपना भरपूर प्यार दें। सतीश जैन की आने वाली फिल्म 'झन भूलो माँ बाप ला-2' को देखने के लिए अपने पूरे परिवार के साथ तैयार रहें!


छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत में पिछले ढाई दशकों से एक नाम वट वृक्ष की तरह अडिग और गहराई से स्थापित है—सतीश जैन। आज वे केवल एक फिल्मकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा के पर्याय और इसकी जीवन रेखा बन चुके हैं। जब-जब हमारी आंचलिक सिनेमा की नैया डगमगाती है या दर्शकों का रुझान हमारे सिनेमा के प्रति कम होने लगता है , तब-तब एक अपराजेय योद्धा की तरह सतीश जैन अपनी नई कृति के साथ पर्दे पर उतरते हैं, और पूरे प्रदेश के सिनेमाघर दर्शकों की भारी भीड़ से गुलजार हो उठते हैं।
​उनकी फिल्मों की सफलता का लाभ केवल उन्हें नहीं मिलता, बल्कि संजीवनी बूटी की तरहइसका सीधा फायदा समूचे छालीवुड और अन्य छत्तीसगढ़ी फिल्मों को मिलता है। सिनेमा प्रेमी भी उन पर अपना भरपूर आशीर्वाद लुटाते हैं।
​राज्य निर्माण के साथ ही सतीश जैन ने अमर ऐतिहासिक फिल्म "मोर छैंहहा भुइंया" दी थी। आज वह शीर्षक खुद सतीश जैन के व्यक्तित्व पर बिल्कुल सटीक बैठता है। वे छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत के लिए एक ऐसी 'छैंहहा भुइंया' ब न चुके हैं, जिसकी छांव में पूरा छालीवुड पल्लवित और पुष्पित हो रहा है। इस उम्र में भी सिनेमा के प्रति उनका आत्मीय समर्पण और जुनून ऐसा है कि वे जिस विषय या जिस कलाकार पर हाथ रख देते हैं, वह 'दीपक' के समान रोशन हो उठता है और उसे जनता का जबरदस्त प्रतिसाद मिलता है।
​इन दिनों छत्तीसगढ़ी सिनेमा के 'लीजेंड शो-मैन' सतीश जैन अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म "झन भूलो माँ बाप ला-2" को लेकर चौतरफा सुर्खियों में हैं। समूचा प्रदेश इस पारिवारिक और सामाजिक सरोकार से भरी फिल्म की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा है। यह कहना बिल्कुल भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि सतीश जैन अब खुद में सिनेमा की एक ऐसी जीवंत पाठशाला बन चुके हैं, जिनसे कोई भी, कभी भी और कहीं भी बहुत कुछ सीख सकता है।
​एक संदेश जो हर छत्तीसगढ़ी के दिल से निकलता है वह ये कि "जैसे हम अपनी संस्कृति और संस्कारों को नहीं भूल सकते, वैसे ही 'झन भूलो माँ बाप ला' की तर्ज पर यह कहना भी जरूरी है कि— 'झन भूलो सतीश जैन ला'। क्योंकि यही वह शख्सियत हैं जो सदैव हमारे परिवार को  स्वस्थ और साफ-सुथरा मनोरंजन देते हैं और हमारे छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत की असली बुनियाद हैं।"
​आइए, इस बेजोड़ फिल्मकार के विजन, समर्पण और छत्तीसगढ़ी माटी के प्रति उनके इस अगाध प्रेम को थियेटरों में जाकर अपना भरपूर प्यार दें। सतीश जैन की आने वाली फिल्म 'झन भूलो माँ बाप ला-2' को देखने के लिए अपने पूरे परिवार के साथ तैयार रहें!
छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत में पिछले ढाई दशकों से एक नाम वट वृक्ष की तरह अडिग और गहराई से स्थापित है—सतीश जैन। आज वे केवल एक फिल्मकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा के पर्याय और इसकी जीवन रेखा बन चुके हैं। जब-जब हमारी आंचलिक सिनेमा की नैया डगमगाती है या दर्शकों का रुझान हमारे सिनेमा के प्रति कम होने लगता है , तब-तब एक अपराजेय योद्धा की तरह सतीश जैन अपनी नई कृति के साथ पर्दे पर उतरते हैं, और पूरे प्रदेश के सिनेमाघर दर्शकों की भारी भीड़ से गुलजार हो उठते हैं।
​उनकी फिल्मों की सफलता का लाभ केवल उन्हें नहीं मिलता, बल्कि संजीवनी बूटी की तरहइसका सीधा फायदा समूचे छालीवुड और अन्य छत्तीसगढ़ी फिल्मों को मिलता है। सिनेमा प्रेमी भी उन पर अपना भरपूर आशीर्वाद लुटाते हैं।
​राज्य निर्माण के साथ ही सतीश जैन ने अमर ऐतिहासिक फिल्म "मोर छैंहहा भुइंया" दी थी। आज वह शीर्षक खुद सतीश जैन के व्यक्तित्व पर बिल्कुल सटीक बैठता है। वे छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत के लिए एक ऐसी 'छैंहहा भुइंया' ब न चुके हैं, जिसकी छांव में पूरा छालीवुड पल्लवित और पुष्पित हो रहा है। इस उम्र में भी सिनेमा के प्रति उनका आत्मीय समर्पण और जुनून ऐसा है कि वे जिस विषय या जिस कलाकार पर हाथ रख देते हैं, वह 'दीपक' के समान रोशन हो उठता है और उसे जनता का जबरदस्त प्रतिसाद मिलता है।
​इन दिनों छत्तीसगढ़ी सिनेमा के 'लीजेंड शो-मैन' सतीश जैन अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म "झन भूलो माँ बाप ला-2" को लेकर चौतरफा सुर्खियों में हैं। समूचा प्रदेश इस पारिवारिक और सामाजिक सरोकार से भरी फिल्म की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा है। यह कहना बिल्कुल भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि सतीश जैन अब खुद में सिनेमा की एक ऐसी जीवंत पाठशाला बन चुके हैं, जिनसे कोई भी, कभी भी और कहीं भी बहुत कुछ सीख सकता है।
​एक संदेश जो हर छत्तीसगढ़ी के दिल से निकलता है वह ये कि "जैसे हम अपनी संस्कृति और संस्कारों को नहीं भूल सकते, वैसे ही 'झन भूलो माँ बाप ला' की तर्ज पर यह कहना भी जरूरी है कि— 'झन भूलो सतीश जैन ला'। क्योंकि यही वह शख्सियत हैं जो सदैव हमारे परिवार को स्वस्थ और साफ-सुथरा मनोरंजन देते हैं और हमारे छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत की असली बुनियाद हैं।"
​आइए, इस बेजोड़ फिल्मकार के विजन, समर्पण और छत्तीसगढ़ी माटी के प्रति उनके इस अगाध प्रेम को थियेटरों में जाकर अपना भरपूर प्यार दें। सतीश जैन की आने वाली फिल्म 'झन भूलो माँ बाप ला-2' को देखने के लिए अपने पूरे परिवार के साथ तैयार रहें!

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