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*फार्मर आईडी और पीओएस मशीन की अनिवार्यता किसान विरोधी कदम :: तारिणी चन्द्राकर*

*फार्मर आईडी और पीओएस मशीन की अनिवार्यता किसान विरोधी कदम :: तारिणी चन्द्राकर*
 जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष तारिणी चन्द्राकर ने उर्वरक वितरण में फार्मर आईडी और पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन की अनिवार्यता को किसान विरोधी कदम बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इसे अव्यवहारिक और समस्याग्रस्त व्यवस्था करार देते हुए कहा कि इससे जमीनी स्तर पर किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। श्रीमति चन्द्राकर कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों मे नेटवर्क कनेक्टिविटी पहले से ही कमजोर है। ऐसे में पीओएस मशीन के जरिए आधार प्रमाणीकरण में बार-बार दिक्कतें आएंगी। सर्वर डाउन रहने की स्थिति में खाद वितरण बाधित होगा और किसानों को सहकारी समितियों चक्कर लगाने पड़ेंगे। विशेष रूप से वृद्ध किसानों के फिंगरप्रिंट मशीन द्वारा पहचान न होने से उन्हें खाद मिलने में कठिनाई होगी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि आधार के लिंकिंग में गड़बड़ी या पीओएस मशीन में गलत एंट्री के कारण कई किसान खाद से वंचित रह सकते हैं, जिससे उन्हें मजबूरन महगे दामों पर बाजार से खाद खरीदना पड़ेगा। श्रीमति चन्द्राकर ने कहा कि बीते खरीफ सीजन में एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन के नाम पर धमतरी जिले के हजारों किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब उसी तरह फार्मर आईडी और पीओएस की अनिवार्यता लागू कर किसानों को खाद से दूर करने की साजिश रची जा रही है। लाखों किसान अब भी पंजीयन से वंचित हैं। सरकार इन्हीं किसानों को खाद से वंचित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि रेगहा और अधिया पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान इस व्यवस्था में सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। 'जब खाद जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर दी जाएगी, तो दूसरे की जमीन पर खेती करने वाले किसानों को कैसे मिलेगा?' यह सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे भूमिहीन किसानों के साथ सीधा अन्याय बताया। खाद की कमी और कालाबाजारी का खतरा चंद्राकर ने सरकार की तैयारियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आगामी खरीफ सीजन के लिए प्रदेश में लगभग 15.55 लाख मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता अनुमानित है, जबकि तैयारी नाकाफी है। धमतरी जिले में जहां करीब 40 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत होती है, वहां अब तक मात्र 18 हजार मीट्रिक टन का ही भंडारण हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सीजन में सहकारी समितियों को कम और निजी दुकानदारों को ज्यादा खाद दी गई, जिससे ओवररेट और कालाबाजारी को बढ़ावा मिला था साथ ही सरकार किसानों से 21 क्विंटल धान खरीदी से बचने के लिए नए-नए तरकीब अपना रहे हैं पिछले धान खरीदी के समय सरकार के द्वारा अनेक नियम कानून बनाकर किसानों को धान बेचने से रोकने का प्रयास किया गया अब खाद वितरण मे अनावश्यक नियम बनाकर किसानों को खाद से वंचित कर फसल उत्पादन मैं कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है. जो कृषि प्रधान राज्य में सरकार की यह किसान विरोधी नीति है।

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