अवमानना प्रकरण में कलेक्टर व राजस्व सचिव बने पक्षकार, प्रभावितों ने सौंपा ज्ञापन—न्यायालय के आदेशों के तत्काल पालन की उठाई मांग
धमतरी, 7 जुलाई। गंगरेल बाँध प्रभावितों के वर्षों से लंबित पुनर्वास एवं वैधानिक अधिकारों से जुड़े प्रकरण में प्रशासनिक जवाबदेही अब सीधे माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष आ गई है। माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने अवमानना प्रकरण में जिला कलेक्टर, धमतरी एवं राजस्व सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को प्रतिवादी/अवमाननाकर्ता के रूप में पक्षकार बनाए जाने की अनुमति देते हुए उनके विरुद्ध नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद गंगरेल बाँध प्रभावित जनकल्याण समिति ने मंगलवार को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्यायालय के आदेशों का तत्काल, प्रभावी एवं पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
समिति ने कहा कि गंगरेल बाँध प्रभावित परिवार वर्षों से पुनर्वास, मुआवजा एवं अन्य वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित आदेशों के बावजूद उनका पूर्ण अनुपालन नहीं होने के कारण प्रभावितों को अंततः अवमानना याचिका का सहारा लेना पड़ा। अब जबकि माननीय उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन एवं राजस्व विभाग के शीर्ष अधिकारियों को भी प्रकरण में पक्षकार बनाए जाने की अनुमति प्रदान कर दी है, ऐसे में प्रशासन की जवाबदेही और अधिक बढ़ गई है।
समिति ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि न्यायालय द्वारा पारित सभी आदेशों का तत्काल एवं अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही गंगरेल बाँध प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, लंबित मुआवजा एवं अन्य वैधानिक अधिकारों से संबंधित सभी प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण करते हुए माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष तथ्यात्मक एवं पूर्ण अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हरिशंकर मरकाम ने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के सम्मान, विधि के शासन तथा गंगरेल बाँध प्रभावित हजारों परिवारों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा का है। उन्होंने कहा कि अब यह मामला केवल पुनर्वास का नहीं, बल्कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन चुका है। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की कि वह इस प्रकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई करेगा, ताकि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे प्रभावित परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार प्राप्त हो सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हरिशंकर मरकाम, महाराजी राम ध्रुव, रामनिहोरा निषाद, रोहित ध्रुव, शम्भू साहू एवं गोपाल सिन्हा उपस्थित रहे। सभी ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का तत्काल एवं पूर्ण पालन सुनिश्चित करते हुए गंगरेल बाँध प्रभावित परिवारों के वर्षों से लंबित पुनर्वास व्यवस्थापन एवं वैधानिक अधिकारों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।