पांच घंटे से अधिक समय तक प्रभावित परिवारों के बीच रहे सार्वा, पेयजल-भोजन की तत्काल व्यवस्था के साथ 15 दिनों की राहत व्यवस्था के निर्देश
नगरी/धमतरी। धमतरी जिले में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश और जलाशयों के भरने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से छोड़े जा रहे पानी के कारण महानदी समेत नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। गंगरेल जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद महानदी किनारे बसे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। विकासखंड नगरी के अंतिम छोर पर बसे दरगहन गांव में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। गांव का नया डीही मोहल्ला सबसे अधिक प्रभावित हुआ, जहां करीब 100 से अधिक घरों में लगभग चार फीट तक पानी भर गया।
स्थिति की जानकारी मिलते ही जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने 25 सितंबर से ही संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर राहत एवं आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। शनिवार, 26 सितंबर की सुबह वे स्वयं दरगहन पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र में पांच घंटे से अधिक समय तक रहकर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।
सार्वा ने प्रभावित परिवारों से सामूहिक रूप से जानकारी लेने तक सीमित रहने के बजाय घर-घर पहुंचकर बाढ़ से हुए नुकसान का निरीक्षण किया। उन्होंने मकानों, घरेलू सामान, खाद्य सामग्री और परिवारों की स्थिति को करीब से देखा तथा ग्रामीणों से उनकी समस्याएं सीधे सुनीं।
पानी और भोजन की समस्या सामने आते ही सक्रिय हुई राहत व्यवस्था
दरगहन पहुंचने पर ग्रामीणों ने पेयजल और भोजन की समस्या से जिला पंचायत अध्यक्ष को अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह तक पर्याप्त पेयजल और भोजन की व्यवस्था नहीं हो पाई थी। इस पर अरुण सार्वा ने तत्काल आसपास की ग्राम पंचायतों से पानी के टैंकर बुलवाकर पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई और राहत कार्यों को सक्रिय करने के निर्देश दिए।
प्रभावित परिवारों को आने वाले दिनों में भोजन की परेशानी न हो, इसके लिए अपनी ओर से भी आवश्यक खाद्य सामग्री एवं सब्जियों की व्यवस्था कराई गई। उनका जोर इस बात पर रहा कि बाढ़ के दौरान किसी भी परिवार को बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान न होना पड़े।
इस दौरान ग्रामीणों पंचराम सेन, विषयलाल साहू, नारायण साहू, कुंभकरण निषाद, रोहित साहू, जेलू राम यादव, चुंबन राम साहू और नोहर निषाद सहित अन्य ग्रामीणों ने बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों और अपनी समस्याओं से जिला पंचायत अध्यक्ष को अवगत कराया।
समय पर सूचना नहीं मिलने की ग्रामीणों ने रखी समस्या
ग्रामीणों ने गंगरेल जलाशय से पानी छोड़े जाने की सूचना समय पर नहीं मिलने को लेकर भी अपनी परेशानी सामने रखी। ग्रामीणों का कहना था कि यदि पानी छोड़े जाने की जानकारी कुछ समय पहले मिल जाती तो वे घरेलू सामान और परिवार के सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की तैयारी कर सकते थे।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि करीब 1500 की आबादी वाले क्षेत्र के लिए केवल एक नाव उपलब्ध होने के कारण आवागमन और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
अरुण सार्वा ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो तथा प्रभावित परिवारों की आवश्यकता के अनुसार तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
घरों के अंदर दिखी बाढ़ की भयावह तस्वीर
जमीनी निरीक्षण के दौरान बाढ़ से हुए नुकसान की गंभीर तस्वीर सामने आई। कई घरों में रखा घरेलू सामान, खाद्य सामग्री और बच्चों की पढ़ाई की किताबें तक पानी में खराब हो गईं। कई कच्चे मकानों में पानी घुसने से परिवारों के सामने सुरक्षित रहने की समस्या खड़ी हो गई है।
80 वर्षीय फग्नीबाई निषाद, जो लंबे समय से लकवे से पीड़ित हैं, के घर में करीब साढ़े तीन फीट पानी भर गया था। परिवार के सदस्यों को उन्हें घर के भीतर उपलब्ध खाली तेल के टीपों के सहारे ऊंचाई पर सुरक्षित रखना पड़ा। यह दृश्य बाढ़ की गंभीरता और प्रभावित परिवारों की मुश्किलों को सामने लाता है।
सार्वा ने लोकनाथ निषाद, लक्ष्मी विश्वकर्मा तथा मूलचंद और ममता साहू सहित अन्य प्रभावित परिवारों के घरों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने क्षति का जायजा लेते हुए अधिकारियों से प्रभावित परिवारों को नियमानुसार आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की दिशा में तत्काल कार्रवाई करने को कहा।
15 दिनों तक पेयजल और भोजन की व्यवस्था के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सदस्य अजय फत्तेलाल ध्रुव, जनपद पंचायत नगरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नारद मांझी और तहसीलदार ख्याति कंवर भी मौजूद रहे।
अरुण सार्वा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आने वाले दिनों में ग्रामीणों को पेयजल और भोजन की समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने करीब 15 दिनों तक आवश्यक राहत व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के मकान बाढ़ के कारण रहने योग्य नहीं रह गए हैं, उनके लिए शासकीय भवनों अथवा अन्य सुरक्षित सार्वजनिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी परिवार की जान-माल को खतरा न हो।
"प्राकृतिक आपदा के समय सभी की सहभागिता जरूरी"
ग्रामीणों से चर्चा करते हुए अरुण सार्वा ने कहा कि बाढ़ की स्थिति प्राकृतिक आपदा का परिणाम है। ऐसे कठिन समय में प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता से राहत एवं पुनर्व्यवस्था के प्रयासों को आगे बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के साथ संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा और राहत एवं पुनर्वास से जुड़े कार्यों में आवश्यक सहयोग किया जाएगा।
राहत व्यवस्था में सीईओ नारद मांझी की सक्रियता
बाढ़ प्रभावित दरगहन में राहत व्यवस्था के दौरान जनपद पंचायत नगरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नारद मांझी भी लगातार मौके पर सक्रिय नजर आए। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों के साथ समन्वय कर आवश्यक व्यवस्थाओं को गति देने में तत्परता दिखाई।
मांझी लगातार ग्रामीणों के बीच मौजूद रहे और उनकी समस्याओं की जानकारी लेते रहे। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि मुश्किल की इस घड़ी में शासन-प्रशासन उनके साथ है और प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उनकी सक्रिय मौजूदगी से ग्रामीणों में भी भरोसा और हौसला दिखाई दिया। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा के लगातार पांच घंटे से अधिक समय तक प्रभावित क्षेत्र में मौजूद रहने और घर-घर पहुंचकर स्थिति देखने से राहत व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक सक्रियता भी दिखाई दी।