शिक्षा का स्तर या फैशन का मंच? DPS धमतरी के ‘Super Mom Fashion Fusion’ पर उठे सवाल
धमतरी। दिल्ली पब्लिक स्कूल, धमतरी में आगामी 4 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले ‘Super Mom Fashion Fusion – Where Strength Meets Style’ कार्यक्रम को लेकर शिक्षा की प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं। स्कूल द्वारा जारी पोस्टर के अनुसार कार्यक्रम शाम 5 बजे से DPS ऑडिटोरियम में आयोजित होना है। पोस्टर में कार्यक्रम को फैशन फ्यूजन के रूप में प्रचारित किया गया है।
स्कूल में फैशन शो का उद्देश्य क्या?
सवाल यह है कि स्कूल परिसर में आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम का शैक्षणिक उद्देश्य क्या है? यदि यह माताओं और अभिभावकों के लिए मनोरंजन अथवा सांस्कृतिक गतिविधि है, तो क्या इसे स्कूल के शैक्षणिक वातावरण से जोड़ने का कोई स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित किया गया है?
स्कूल बच्चों के बौद्धिक, वैज्ञानिक, रचनात्मक और व्यक्तित्व विकास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में अभिभावकों के बीच यह चर्चा होना स्वाभाविक है कि स्कूल में होने वाले कार्यक्रमों की प्राथमिकता शिक्षा और बच्चों के सर्वांगीण विकास के अनुरूप कितनी है।
क्या स्कूलों में अब फैशन शो भी होंगे?
फैशन या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने पर आपत्ति नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि स्कूल परिसर में ऐसे आयोजनों की सीमा और उद्देश्य क्या होना चाहिए?
क्या इसी तरह के आयोजनों के साथ स्कूल में विज्ञान प्रदर्शनी, क्विज, साहित्यिक गतिविधियां, नवाचार, तकनीकी प्रतियोगिताएं, खेल और बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों को भी समान महत्व दिया जा रहा है?
बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
बच्चे अपने आसपास होने वाली गतिविधियों से सीखते हैं। इसलिए विद्यालय में आयोजित हर कार्यक्रम का बच्चों के वातावरण और सोच पर प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के सामने प्रस्तुत गतिविधियों में शिक्षा, अनुशासन, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सामाजिक मूल्यों का संतुलन महत्वपूर्ण है।
ऐसे में सवाल यह भी है कि ‘Super Mom Fashion Fusion’ को बच्चों के सर्वांगीण विकास से किस प्रकार जोड़ा गया है और कार्यक्रम के दौरान बच्चों की भूमिका क्या होगी?
शिक्षा विभाग क्या करेगा?
अब निगाहें जिला शिक्षा विभाग पर हैं। क्या विभाग इस आयोजन की प्रकृति, स्कूल परिसर में ऐसे कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति/नियमों और बच्चों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की समीक्षा करेगा?
क्या शिक्षा विभाग स्कूल प्रबंधन से कार्यक्रम का उद्देश्य, स्वरूप और बच्चों की भागीदारी को लेकर जानकारी लेगा? या फिर स्कूल परिसर में होने वाले ऐसे आयोजनों को लेकर विभाग की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं?
बड़ा सवाल—स्कूल की प्राथमिकता क्या हो?
स्कूल केवल भवन और कार्यक्रमों का मंच नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण का स्थान है। इसलिए सवाल किसी एक आयोजन के विरोध का नहीं, बल्कि शिक्षा और अन्य गतिविधियों के बीच प्राथमिकता और संतुलन का है।
अब देखना होगा कि DPS धमतरी प्रबंधन इस आयोजन के उद्देश्य को किस रूप में स्पष्ट करता है और शिक्षा विभाग इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है।
Hindutv TV का सवाल—
“स्कूल शिक्षा का केंद्र है या अब फैशन और मनोरंजन का मंच भी?”
“बच्चों के बौद्धिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को कितनी प्राथमिकता मिल रही है?”